इस दुनिया में मेरे जैसा शायद कोई और नहीं ।।

सब पे अपने-अपने छत हैं बस मेरा ही ठौर नहीं ।।1।।

डाकू ,चोर ,लुटेरे ,तस्कर ,ठग जग में पग-पग पर ,पर ;

चित्त चुराने वाला मिलता कोई माखन चौर नहीं ।।2।।

उसको छोटे-छोटे कीट-पतंगे साफ़ दिखें लेकिन ,

हम जैसों पर उसकी पैनी नज़रें करतींं ग़ौर नहीं ।।3।।

मनवा कर रहता वो अपनी हर बात ज़माने से ,

बेशक़ उसके पाँव में जूते सिर पर कोई मौर नहीं ।।4।।

अपने पैर खड़ी नारी का मान बहुत ससुराल में अब ,

वो बहुओं पर भारी पड़ती सासों वाला दौर नहीं ।।5।।

हैराँ हूँ क्यों चाट रहे हैं कुत्ते-बिल्ली आपस में ,

उनका तो दुश्मन से प्यार-मोहब्बत वाला तौर नहीं ?6।।

सोना-चाँदी , मानव , पशु-पक्षी , धरती-आकाश तलक ,

सब कुछ वश में कर लोगे पर मन पर ज़ोर नहीं ।।7।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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