मुझे दोस्तों से मिला न तू ,

मुझे दुश्मनी का ही शौक़ है ।।

मुझे प्यार से तू देख मत ,

मुझे बेरुख़ी का ही शौक़ है ।।1।।

मुझे इंतिहा में न बाँध तू ,

मुझे हद से पार तू जाने दे ,

मुझे मत ख़ुदा का दे वास्ता ,

मुझे काफ़िरी का ही शौक़ है ।।2।।

मुझे हर तरफ़ ही दिखे सियह ,

औ’ सियाह बस ये मैं सच कहूँ ,

मुझे रौशनी का क़त्ई नहीं ,

मुझे तीरगी का ही शौक़ है ।।3।।

मुझे कह लो तुम बड़े शौक़ से ,

बड़ा मतलबी , बड़ा ख़ुदग़रज़ ,

करूँ क्या मगर जो कि ख़ुद से ही ,

मुझे आशिक़ी का ही शौक़ है ।।4।।

मेरी ज़िंदगी का जो हाल हो ,

मुझे फिर भी सर की क़सम मेरे ,

बड़ी मुश्किलें हैं यहाँ मगर ,

इसी ज़िंदगी का ही शौक़ है ।।5।।

ये भला किसे नहीं हो पता ,

कि शराब कैसी है चीज़ पर ,

वो करे भी क्या कि जिसे फ़क़त ,

बड़ा मैकशी का ही शौक़ है ?6।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *