वो जेह्नोदिल में जो बस आन बसा , जा न सका ।।

वो स्वाद हमने चखा जिसका मज़ा , जा न सका ।।

वो हो न पाया मयस्सर कहीं भी फिर पर उस –

शराबे वस्ल का ताउम्र नशा , जा न सका ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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