गीत : बला की तू तो ख़ूबसूरत है

बला की तू तो ख़ूबसूरत है ।। ख़ुदा क़सम ख़ुदा की मूरत है ।। बला की तू……………………. ख़ुदा क़सम………………….. ज़मीं के चाँद से ऊपर का चाँद शर्माए , तू शाम आई सरेबाम चाँद क्यों आए ? गुलाब ख़ुश था की वैसा...Read more

देवी गीत ( 2 ) तेरे दर्शन को आना चाहूँ

तेरे दर्शन को आना चाहूँ पर आऊँगा मैं कैसे माँ ? पग जाते रहे दोनों मेरे चल पाऊँगा मैं कैसे माँ ? तेरे दर्शन को आना चाहूँ……………………………? हाथों में शंख चक्र साजै मुखड़े पर तेज रहे पावन , सुनता बस...Read more

126 : ग़ज़ल – पहले सी हममें तुममें

पहले सी हममें तुममें मोहब्बत न अब रही ।। इक दूसरे की दिल में वो इज्ज़त न अब रही ।।1।। दीनार में औ’ गिन्नी में तुलते थे पहले हम , धेले की कौड़ी भर की भी क़ीमत न अब रही...Read more

मुक्तक : 514 – इश्क़ में जाने कैसे-कैसे

इश्क़ में जाने कैसे-कैसे पापड़ बेले हैं ।। शादी के तो बाद और भी विकट झमेले हैं ।। पहले लगता था है अकेलापन इक बड़ी सज़ा , अब लगता है हमसे बेहतर निपट अकेले हैं ।। -डॉ. हीरालाल प्रजापति Read more

मुक्तक : 513 – दुनिया न सही गाँव

दुनिया न सही गाँव-नगर होता तेरा मैं ।। दिलबर न सही दोस्त अगर होता तेरा मैं ।। रहती तसल्ली कुछ जो तुझसे रहती निस्बतें , दुश्मन ही सही कुछ तो मगर होता तेरा मैं ।। -डॉ. हीरालाल प्रजापति Read more