ऐ झुरमुट एक बार पेड़-झाड़ से तू मिल ॥

ओ ऊँट इक दफ़ा किसी पहाड़ से तू मिल ॥

हैं इस जहाँ में लोग इक से बढ़के इक कई ,

खिड़की कभी तो दुर्ग के किवाड़ से तू मिल ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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