उसके पहलू में सुब्ह सोऊँ जाग रात करूँ ॥

इतना पाया न कभी वक़्त उससे बात करूँ ॥

उसकी सुह्बत की रही सिर्फ़ मेरी हस्रत ही ,

ख़ाली अर्मान रहा उससे मुलाक़ात करूँ ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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