कह पाओ रू-ब-रू ना नाजुक-ओ-नरम दिल के ।।

पढ़ संगदिल भी जिनको हो जाएँ रहम दिल के ।।

पैग़ामे मोहब्बत वो भेज ऐसे कबूतर से ,

क़िर्तास पे वो कर सब जज़्बात रक़म दिल के ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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