जैसे कि दे के दीद यकायक क़रीब से ,

जन्नत मेरी इन आँखों को बख़्शी नसीब से ;

वैसे ही कर दो दौलते दिल नज़्र , प्यार का –

बन जाऊँ मैं अमीर इसी दम ग़रीब से ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *