इश्क़ अकेले में पड़ क्या-क्या पापड़ बेले हैं ?

शादी के बाद और सुनें भरमार झमेले हैं !!

पहले लगता था कि अकेलापन इक सख़्त सज़ा है ,

अब लगता हमसे बेहतर तो यार अकेले हैं ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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