तेरे दर्शन को आना चाहूँ पर आऊँगा मैं कैसे माँ ?

पग जाते रहे दोनों मेरे चल पाऊँगा मैं कैसे माँ ?

तेरे दर्शन को आना चाहूँ……………………………?

हाथों में शंख चक्र साजै मुखड़े पर तेज रहे पावन ,

सुनता बस आया हूँ तेरा है रूप बड़ा ही मनभावन ,

अब नयनहीन दर्शन तेरे कर पाऊँगा मैं कैसे माँ ?

पग जाते रहे दोनों मेरे चल पाऊँगा मैं कैसे माँ ?

तेरे दर्शन को आना चाहूँ……………………………?

सज्जन दुर्जन कोई भी हो जो भी जाये तेरे द्वारे ,

हर ले झट सबके कष्ट करे कल्याण सभी का तू तारे ,

दरबार में तेरे पहुँचे बिन तर पाउँगा मैं कैसे माँ ?

पग जाते रहे दोनों मेरे चल पाऊँगा मैं कैसे माँ ?

तेरे दर्शन को आना चाहूँ……………………………?

है शक्ति तेरी भक्ति में बड़ी ध्यानू की लाज धरी तूने ,

गदगद हो वीर शिवाजी को अविजित तलवार वरी तूने ,

बिन तुझको प्रसन्न किये मन के वर पाउँगा मैं कैसे माँ ?

पग जाते रहे दोनों मेरे चल पाऊँगा मैं कैसे माँ ?

तेरे दर्शन को आना चाहूँ……………………………?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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