दिलचस्प नहीं दर्द भरी साफ़बयानी  ।।

मैं आज जहाँ हूँ वाँ पहुँचने की कहानी ।।1।।

सूरत की कमी से न पढ़ा उसने मेरा दिल ,

हाँ रूह से इज्ज़त दी क़त्ई इश्क़ न जानी ।।2।।

चढ़ते को सलाम और लुढ़कते को अँगूठा ,

सदियों से भी , आदत है ये , लोगों की पुरानी ।।3।।

कुछ कर कि गुज़र कर न कभी आएँ दोबारा ,

जीवन में चढ़ा जोम , न जोबन , न जवानी ।।4।।

कर करके कई खड्ड भी प्यासे ही रहोगे ,

खोदोगे कुआँ एक ठो पा जाओगे पानी ।।5।।

हर हाल में होती है बुरी पीने की आदत ,

जब तक न फुँँका था ये जिगर बात न मानी ।।6।।

वो एक के बाद एक मुझे देते रहे ग़म ,

मैं लेता रहा जान मोहब्बत की निशानी ।।7।।

चाहा ही उसे जिसका न होना था मेरा तै,

समझा न कभी इश्क़ था या हेचमदानी ।।8।।

( हेचमदानी = मूर्खता , अज्ञान )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *