स्याह राहों में चमकते रहनुमा महताब सी ।।

तपते रेगिस्ताँँ में प्यासों को थी शर्बत , आब सी ।।

उसका दिल लोगों ने जब फ़ुटबॉल समझा , हो गयी ,

उसकी गुड़-शक्कर ज़बाँँ भी ज़ह्र सी , तेज़ाब सी ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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