कोयल-कुहुक न काक-काँव-काँव से पूछो ।।

मत झूठे शह्रों से न गाँव-गाँव से पूछो ।।

मेरी सचाई की जो चाहिए गवाहियाँ ,

तो धूप-चाँदनी से छाँव-छाँव से पूछो ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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