जब अपना ख़्वाब टूटा बड़ा दिल का ग़म बढ़ा ।।

तब मरते कहकहों का यकायक ही दम बढ़ा ।।

जीने को और-और भी मरने लगे अपन ,

जब ज़ुल्म ज़िन्दगी पे हुआ जब सितम बढ़ा ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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