मुक्तक : 532 – याद तेरी जहाँ पे

याद तेरी जहाँ पे मुझको तड़फड़ाती है ।। आँख जिस जा पे जा के आँसू टपटपाती है ।।  मुझको जाना न चाहिए वहाँ कभी लेकिन , चाल मेरी मेरे क़दम वहीँ बढ़ाती है ।। -डॉ. हीरालाल प्रजापति Read more

मुक्तक : 531 – कर देंगे ख़ूब अच्छा

कर देंगे ख़ूब-अच्छा , भरपूर-प्यारा आलम ।। है जो अभी बुरा सा दिखता हमारा आलम ।। वादे पे उनके ठेका अब दे दिया है देखें , रक्खेंगे ज्यों का त्यों या बदलेंगे सारा आलम ।। -डॉ. हीरालाल प्रजापति Read more