करवट बदल-बदल के मैंने उनकी की ख़बर ।।

सब रात जाग-जाग कर ही आज की बसर ।।1।।

ख़ुद की ख़बर न उसको जो रखे ज़ुबान पर ,

सब शह्र , हर गली की , कूचे-कूचे की ख़बर !!2!!

माँगे बग़ैर उसने क्या नहीं किया अता ,

चाही गई कभी न चीज़ नज़्र की मगर !!3!!

बस जन्नतों की , दोज़ख़ों की , आस्मान की ,

करते हैं फ़िक्र रात-दिन वो रह ज़मीन पर !!4!!

शैतानों को तो बाहरी भी पूज वो रहा ,

घर के फ़रिश्तों की भी कर रहा न क़द्र पर !!5!!

जैसे कि टल गई हो उसके सर से हर बला ,

मरने का मेरे उसने यों मनाया जश्न घर !!6!!

उसको मेरी ज़रूरतोंं की भी न फ़िक्र कुछ ,

पूरी की मैं ने जिसकी हर तमन्ना उम्र भर !!7!!

जा-जा के दुनिया भर का पूछे हाल-चाल वो ,

पुर्सिश को मेरी भूलकर न आए वो इधर !!8!!

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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