रफ़्ता-रफ़्ता तेज़ से भी तेज़ चलती जा रही ॥

गर्मियों के बर्फ़ की मानिंद गलती जा रही ॥

सदियाँ लाज़िम हैं हमें और पास हैं बस चंद दिन ,

भर जवानी फ़िक्र में इस उम्र ढलती जा रही ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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