पोखर के गंदे पानी को कह डाल गंगा-जल ॥

खुर जैसे पंजों को भी तू कह ले चरण-कमल ॥

पर चापलूस ये तो ख़ुशामद की हद ही है ,

मतलब को तू गधे से करे बाप को बदल !!

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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