समुंदरों से कम की ये न थाह लेता है ॥

हुजूमे ग़म जहाँ हो दिल पनाह लेता है ॥

इसे है शौक़ जैसे काँटो पे ही सोने का ,

कभी न नींद को ये ख़्वाबगाह लेता है ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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