मंदिरों में मस्जिदों में रूहो – दिल में जो ख़ुदा ॥

एक ही सब शक्लों में है ईश हो या वो ख़ुदा ॥

एक दिन हो जाएँगे ऐसे तो लाखों दोस्तों ,

कितना भी अच्छा हो इंसाँ उसको मत बोलो ख़ुदा ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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