लाखों , मातम में भी जिगर न जो बिलख रोएँ ॥

जिस्म तोला हजारों रत्ती सर टनों ढोएँ ॥

देख हैराँ न हो यहाँ बगल में फूलों के ,

सैकड़ों , नोक पे काँटों की मुस्कुरा सोएँ ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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