मुक्तक : 593 – यूँ ही सी नहीं कोई

यूँ ही सी नहीं कोई मुसीबत से सामना ॥ करता हूँ नई रोज़ अज़ीयत से सामना ॥ यूँ भी न समझ दर्द उठाता हूँ हो खफ़ा , करता हूँ तह-ए-दिल से , तबीअत से सामना ॥ -डॉ. हीरालाल प्रजापति Read more

मुक्तक : 592 – इक बार हमने सचमुच

इक बार हमने सचमुच इतनी शराब पी थी ॥ इक घूँट में दो प्यालों जितनी शराब पी थी ॥ यारों का दोस्ती की सर पर क़सम था धरना , फिर होश ना रहा कुछ कितनी शराब पी थी ? -डॉ. हीरालाल प्रजापति Read more

मुक्तक : 591 – घूँट दो घूँट भरते-भरते

घूँट दो घूँट भरते-भरते फिर , पूरा भर-भर रिकाब पीने लगे ॥ आबे ज़मज़म के पीने वाले हम , धीरे-धीरे शराब पीने लगे ॥ दर्दो-तक़्लीफ़ के पियक्कड़ थे , पर तेरा हिज्रे-ग़म न झेल सके , पहले पीते थे बाँधकर...Read more

149 : ग़ज़ल – मुझे ग़म देने वाले

मुझे ग़म देने वाले अब ख़ुशी तुम भी न पाओगे ॥ मुझे यूँ मारकर तुम भी ज़ियादा जी न पाओगे ॥ किसी की तड़पनों की दिल्लगी तुमने उड़ाई है , मगर हर दिल्लगी इतनी कभी सस्ती न पाओगे ॥ दिलों को...Read more

148 : ग़ज़ल – उसका जीवन सुधर गया

उसका जीवन सुधर गया होता ॥ मरने से कुछ ठहर गया होता ॥ तैरना जानता तो बिन कश्ती – और पर बिन भी तर गया होता ॥ मुझसे वो बोलते तो मुश्किल क्या , ग़ैर मुमकिन भी कर गया होता ॥ ज़िंदगी...Read more

147 : ग़ज़ल – ग़ज़लों में आँसू

ग़ज़लों में आँसू बोता हूँ ॥ लेकिन तुझको ना रोता हूँ ॥ तेरी भारी भरकम यादें , फूलों सी दिल में ढोता हूँ ॥ तेरा नाम भजन है मुझको , मैं उसका रट्टू तोता हूँ ॥ इक तेरा क्या हो बैठा मैं ,...Read more