कभी उनसे से ज़रा मिल जाएँ पल दो पल निगाहें ॥

हो बेक़ाबू मेरा दिल घंटों – घंटों भरता आहें ॥

क़दम उन तक पहुँचने को बदल जाएँ परों में ,

सटा लेती हैं सीने से उन्हें ख़्वाबों में बाहें ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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