पूर्ण पृथ्वी जिसका आँगन हो गगन छप्पर ॥

एक इतना ही बड़ा अद्भुत बनाएँ घर ॥

विश्वजन चिरकाल तक आनंद से जिसमें ,

प्रेम से , ईमानदारी से रहें मिलकर ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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