देख कर सिर्फ़ सफ़ेदी को चून कहना ग़लत ।।

लाल रंग तकते ही स्याही को ख़ून कहना ग़लत ।।

अश्क़ खारे हों हो खारा तो पसीना भी मगर ,

स्वाद के दम पे उन्हें नोन-नून कहना ग़लत ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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