हे शिव जो जग में है अशिव तुरत निवार दो ।।

परिव्याप्त मलिन तत्व गंग से निखार दो ।।

स्वर्गिक बना दो पूर्वकाल सी धरा पुनः ,

या खोल अपना तीसरा नयन निहार दो ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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