बस उछल-कूद और गंदे नाच गाने ॥

हर तरफ़ बेखौफ़ बढ़ते नंगियाने ॥

कौन सी तहज़ीब का ये दौर आया ,

औ’ कहाँ ले जा रहा कोई न जाने ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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