चाँद से गंजों को काले विग घने ॥

दंतहीनों वास्ते डेंचर बने ॥

उड़ नहीं सकते मगर हों पीठ पर ,

पर शुतुरमुर्गों के शायद देखने ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *