याद के शोलों में ख़ुद को , फूँकता है आज भी ॥

तू नहीं फिर भी तुझे दिल , ढूँढता है आज भी ॥

जाते-जाते वो तेरा मुझको बुलाना चीखकर ,

रात-दिन कानों में मेरे , गूँजता है आज भी ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *