इक चिनगी एक सूखते जंगल की आग सा ॥

इक चींटी एक काले ख़तरनाक नाग सा ॥

दोनों में कुछ मुक़ाबला ठहराना गलत है ,

इक आफ़्ताब है तो इक फ़क़त चिराग सा ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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