मोमी तो अश्क़ दरिया से बहा गए थे सच ॥

पत्थर की आँखों में भी अब्र छा गए थे सच ॥

इतनी थी उसकी दर्दनाक दास्ताँ कि सुन ,

दुश्मन के भी कलेजे मुँह को आ गए थे सच ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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