उसकी हसीन शक्ल दिल को लूट न जाती !!

हाथ आते-आते वो छिटक के छूट न जाती !!

बनते ही बनते मेरी ज़िंदगानी फ़लक से ,

शीशे सी गिर ज़मीं पे टूट-फूट न जाती !!

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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