उन से ,

आप से ,

स्वयं से ,

सब से ,

एक ही

किन्तु

कदाचित

यक्ष प्रश्न :

क्यों

अपने अवश्यंभावी नश्वर शरीर की

अंतिम साँस तक

रक्षा करते रहने के लिए

हम करते ही रहते हैं

अजर , अमर , अविनाशी

अपनी ही

आत्मा की

बारंबार

नृशंस हत्या ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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