ख़ूब पुर्सिश और की तीमार बरसों तक ॥

हम रहे इक-दूजे के बीमार बरसों तक ॥

कब मिले आसानियों से हम ? जुदाई में

हिज्र की रो-रो सही थी मार बरसों तक ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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