हाथ उठाकर आस्माँ से हम दुआ ॥

रात-दिन करते रहे तब ये हुआ ॥

कल तलक जिसके लिए थे हम नजिस ,

आज उसी ने हमको होठों से छुआ ॥

( नजिस = अछूत, अस्पृश्य , अपवित्र )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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