तुम माँगते जो कंकड़ सच देता मैं नगीना ॥

तुम करते दिन तलब झट दे देता मैं महीना ॥

जब वक़्त मेरी मुट्ठी में था न आये तब तुम ,

तब क्यों न आये तुम जब तलवों में था दफ़ीना ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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