डर किसका था तुमको ?

क्यों मुझसे पूछा न –

एक बार बतलाओ ?

तुम मुझपे मरते रहे ,

बिन पूछे करते रहे ,

चाँद को चकोरे सा

क्यों ये प्यार बतलाओ ?

सोची न युक्ति कभी ,

चाही न मुक्ति कभी ,

कैसे होता भाटा

प्रेम ज्वार बतलाओ ?

तुम यों ही देते रहे ,

बिन दाम हम लेते रहे ,

कैसे होगा चुकता

ये उधार बतलाओ ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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