रह सतर्क देना वक्तव्य ।।

यदि निंदा भी करे तो सुन ,

ब्याज स्तुति के ढंग को चुन ,

शब्द प्राण हर सकते हैं ,

गाली भी बक जो हो श्रव्य ।।

हर रहस्य का पर्दा फाड़ ,

मुर्दा सड़ा-गला भी उखाड़ ,

यदि हो लाभ तो निःसन्देह –

अन्यथा चुप रहना ही भव्य ।।

कह ग़ज़लें या कहानी कह ,

बात पुरानी-धुरानी कह ,

किन्तु भूर्ज पत्रों को अब –

कह चिकने कागज़ अति नव्य ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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