अपना अहं घटा कर देखो ॥

तुमको भी चहुंओर दिखेगा ,

विरल नहीं घनघोर दिखेगा ,

सूखा , पीला यदि आँखों से –

ऐनक हरा हटा कर देखो ॥

वह बच्चा मैला सारा है ,

पर अस्पृश्य नहीं प्यारा है ,

मात्र दृष्टि से घृणा हटा कर –

छाती से लिपटा कर देखो ॥

बीच राह में आते जाते ,

शक्तिहीन को क्या धमकाते ,

जो तुमसे बलवान शत्रु हो –

उसको धूल चटा कर देखो ॥

रावण को भी राम कहेगा ,

कंस को कृष्ण न श्याम कहेगा ,

वह मति मूढ़ नाम जप धुन में –

शुक को राम रटा कर देखो ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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