मुझसे फिर अपना दिल लगा दे आ ॥

मिट रही ज़िंदगी बना दे आ ॥

गिर रहा हूँ मैं तेरी नफ़्रत से ,

कर मोहब्बत मुझे उठा दे आ ॥

तुझको मिलती है गर ख़ुशी इसमें ,

मुझको तड़पा मुझे सज़ा दे आ ॥

बेवफ़ा है बुरा है तो ज़ालिम ,

क़त्ल करके मेरा बता दे आ ॥

है अगर बेक़सूर तू तो फिर ,

कोई पक्का सुबूत ला दे आ ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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