मशहूर को जहाँँ से , गुमनाम बना डाला ।।

होते ही सुब्ह फ़ौरन , क्यों शाम बना डाला ।।1।।

मैकश हुआ ही तेरी , सुह्बत का असर पूरा ,

इक मै-अदू को भी मै-आशाम बना डाला ।।2।।

लतियाता तू न होता , तो बस मैं चना रहता ,

ठोकर ने तेरी काजू-बादाम बना डाला ।।3।।

पूनम की चाँदनी था , बरगद का था साया मैं ,

तूने भरी दुपहरी , का घाम बना डाला ।।4।।

हालात ने वो करवट बदली कि सियावर को ,

श्रीराम से बदल राधेश्याम बना डाला ।।5।।

( मैकश=शराबी ,मै-अदू=मदिरा-शत्रु ,मै-आशाम=मदिरा-प्रेमी ,घाम=धूप )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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