बोलो अब तक किसने देखे ?

जितने सर पर केश तुम्हारे ।

नीलगगन में जितने तारे ।

स्वप्न सुनहरे लेकर तुमको –

मैंने गिनकर इतने देखे ॥

गहन उदधि कभी तुंग हिमाचल ।

कभी अगन तुम कभी बरफ-जल ।

समय-समय पर रूप तुम्हारे –

मैंने नाना कितने देखे ?

देखे तो मैंने कई सारे ।

जग में न्यारे-न्यारे प्यारे ।

उनमें तुमसे अधिक न पाया –

मैंने सुंदर जितने देखे ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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