अभी तो हम चेतन हैं ।

यदि पहले से ही हमें पता हो

हमारी मौत का दिन ।

हमें पता हो कब होने वाला है

हमारा अपमान ?

हम जिस परीक्षा में बैठने वाले हैं

उसमें क्या पूछा जाने वाला है ?

क्या चल रहा है दूसरों के मन में ?

वह सब जान सकें चुटकी बजाते ही

जो जो भी हम जानना चाहें ।

प्रश्न यह है कि –

यदि यह सब संभव हो जाए तो क्या होगा ?

यदि हम सब यह मान बैठें या

सचमुच ही यही सच होता भी हो कि –

जब जब जो जो होता है

तब तब वो वो ही होता ही है ।

तो फिर हमें  क्यों रह जाएगी

कुछ भी करने की आवश्यकता ?

हमें करना भी चाहिए क्यों कुछ ?

हमारे जीवन का क्या उद्देश्य होगा

यदि सब कुछ पूर्व निर्धारित है तो ?

क्या अज्ञात के प्रति जिज्ञासा ही

जीवन का आनंद नहीं है ?

संघर्ष ही गति का कारण नहीं है क्या ?

लगता है

हमें निरंतर चलायमान बनाए रखने का

अनिवार्य कारण है –

सतत अनुसंधान , शोध , खोज , तलाश ।  

अन्यथा क्या हम जड़ न हो जाएंगे ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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