सरे बज़्म मेरी बाहों में आकर के झूम ले ॥

तनहाई में पकड़ के मेरा हाथ घूम ले ॥

बेशक़ ! बशौक़ दे-दे तू फिर मौत की सज़ा ,

सिर्फ़ एक बार मुझको तहेदिल से चूम ले ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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