सब कुछ वो मुझसे छीन-झपट आज ले गया ॥

हिलमिल के रहते थे जो मेरे संग प्यार से ।

पाले थे मैंने जितने भी विहंग प्यार से ।

पिक,काक,शुक,कपोत और बाज ले गया ॥

दो-चार-पाँच-छः या कदाचित् वो सात थे ।

पर जो भी मेरे पास में जवाहिरात थे ।

जैसे कि हीरा,नीलम,पुखराज ले गया ॥

कपड़े जो तन पे थे बस उनको छोड़ के सभी ।

चद्दर , अँगोछा भी गया ले मोड़ के सभी ।

जूते भी और टोप माने ताज ले गया ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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