इक अहा सौ आहों के भरने के बाद ।।

हिम सी यदि ठंडक मिले जरने के बाद ।।

ऐसी आहा ऐसी शीतलता है ऐसी ,

फिर से ज्यों जी जाए जिव मरने के बाद ।।

[ जरने=जलना ,जिव=जीव ]

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *