उसको विपल भर विस्मृत करना संभव नहीं हुआ ॥

प्रतिक्षण हृद ही हृद रोने से टुक रव नहीं हुआ ॥

और नहीं कुछ प्राण था वो पर उस बिन मैं ; सोचना ,

होगी मेरी क्या लौह-विवशता जो शव नहीं हुआ ?

[ विपल = पल का साठवाँ भाग / हृद ही हृद = दिल ही दिल में /टुक रव = थोड़ा सा भी शोर  ]

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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