कभी जो बर्फ़ में फ़ौलाद मोम सा पिघले ।।

ग़ज़ाल शेर को ज़िंदा पटक उठा निगले ।।

भुला चुका हूँ उन्हें तुम ये मानना उस दिन ,

कि मेरी आँख से जिस दिन भी दर्या ना निकले ।।

( ग़ज़ाल=हिरण का बच्चा , दर्या=नदी )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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