ऐश-ओ-आराम की हसरत अज़ाब से पूरी ।।

आब-ए-ज़मज़म की ज़रूरत शराब से पूरी ।।

क्या बताएँ रे तुझे कैसे-कैसे की हमने ?

बारहा तेरी तलब सिर्फ़ ख़्वाब से पूरी !!

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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