अधि ,अद्वितीय ,अति अतुल्य ,अरु अनूप से ॥

तन-मन में भर दे आग ऐसे त्रिय-स्वरूप से ॥

स्वस्तित्व को बचाने बर्फ़-ब्रह्मचारियों ,

बचना सदैव जलती-चिलचिलाती धूप से ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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